सीधा जवाब: 2026 में राधा जी की छठी 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को मानी जा रही है। यह तारीख 19 सितंबर 2026 की राधाष्टमी के बाद छठी उत्सव की स्थानीय परंपरा के आधार पर बताई जाती है। हालांकि अलग-अलग मंदिरों, विशेषकर ब्रज क्षेत्र के स्थानीय आयोजनों में पूजा की तिथि, क्रम या समय में अंतर हो सकता है।
2026 में राधा जी की छठी कब है? सामान्य और प्रचलित स्थानीय परंपरा के अनुसार राधा रानी की छठी 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को मानी जाती है। इस तारीख का आधार राधा अष्टमी है, जो 2026 में 19 सितंबर को पड़ रही है; कई स्थानों पर राधा रानी की छठी राधाष्टमी के छठे दिन मनाने की परंपरा प्रचलित है।
यही कारण है कि राधा रानी की छठी 2026 की तारीख 25 सितंबर मानी जा रही है। हालांकि ब्रज के सभी मंदिरों में छठी पूजन का क्रम बिल्कुल एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। रावल, मथुरा और अन्य धार्मिक स्थलों में स्थानीय मंदिर परंपरा के अनुसार कार्यक्रम में अंतर हो सकता है।
इस खास अवसर पर भक्त श्री राधा-कृष्ण का पूजन करते हैं, फूल और सात्विक भोग अर्पित करते हैं और भजन, कीर्तन, मंगल गीत व आरती में शामिल होते हैं। पूजा के बाद प्रसाद बांटने की भी परंपरा है।
राधा रानी की छठी का पूजा समय मंदिर या आयोजन के अनुसार तय किया जाता है। यदि आपके स्थानीय कार्यक्रम में मुख्य छठ पूजन शाम 7 बजे निर्धारित है, तो उसी समय पूजा करना उचित रहेगा।
| जानकारी | विवरण |
| राधा अष्टमी 2026 | 19 सितंबर 2026, शनिवार |
| राधा रानी की छठी | 25 सितंबर 2026, शुक्रवार |
| छठी का आधार | राधाष्टमी के बाद मनाई जाने वाली स्थानीय छठी परंपरा |
| मुख्य पूजन | श्री राधा-कृष्ण पूजन |
| पूजा समय | शाम 7 बजे* |
| प्रमुख आयोजन | पूजा, मंगल गीत, भजन, कीर्तन, आरती और प्रसाद |
| भोग | खीर, माखन-मिश्री, फल, हलुआ या अन्य सात्विक भोग |
| प्रमुख क्षेत्र | ब्रज, मथुरा, रावल, बरसाना, वृंदावन तथा अन्य मंदिर |
| परंपरा | मंदिर और क्षेत्र के अनुसार कुछ अंतर संभव |
*पूजा का सटीक समय संबंधित मंदिर या आयोजन के कार्यक्रम के अनुसार देखें।
ध्यान दें कि 25 सितंबर 2026 को अन्य धार्मिक आयोजन भी हो सकते हैं, इसलिए यदि आप किसी विशेष मंदिर में दर्शन या कार्यक्रम में शामिल होने की योजना बना रहे हैं तो स्थानीय समय-सारणी पहले देख लेना उपयोगी रहेगा।
संक्षिप्त उत्तर: राधा अष्टमी श्री राधा रानी के प्राकट्य या जन्मोत्सव से जुड़ा प्रमुख पर्व है, जबकि राधा रानी की छठी उनके जन्मोत्सव से जुड़ी धार्मिक और स्थानीय परंपरा है।
2026 में राधा अष्टमी 19 सितंबर, शनिवार को मनाई गई। इसके बाद कई स्थानों पर राधा रानी के बाल स्वरूप और जन्मोत्सव से जुड़ा छठी उत्सव आयोजित किया जाता है।
राधाष्टमी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से जुड़ा पर्व है, जबकि छठी का आयोजन मंदिर और क्षेत्र की परंपरा से भी प्रभावित हो सकता है।
इसलिए दोनों पर्व आपस में जुड़े हुए हैं, लेकिन दोनों एक ही धार्मिक आयोजन नहीं हैं।
राधा जी की छठी कब है, इसका उत्तर कुछ स्थानों पर स्थानीय परंपराओं के कारण अलग मिल सकता है।
कई मंदिरों और धार्मिक आयोजनों में राधा अष्टमी के बाद राधा रानी की छठी मनाने की परंपरा है। इसी आधार पर 2026 में 25 सितंबर को छठी उत्सव मनाया जा रहा है।
लेकिन ब्रज क्षेत्र के अलग-अलग मंदिरों में धार्मिक आयोजनों का क्रम मंदिर परंपरा के अनुसार बदल सकता है।
विशेष रूप से रावल जैसे धार्मिक स्थल की अपनी स्थानीय परंपराएं हैं। पुराने प्रकाशित विवरणों में वहां छठी पूजन को राधा जन्मोत्सव के आसपास अलग क्रम में आयोजित किए जाने का उल्लेख मिलता है।
इसलिए 25 सितंबर 2026 को इस लेख में मुख्य छठी तारीख के रूप में बताया गया है, लेकिन किसी विशेष मंदिर की पूजा-विधि या समय के लिए उसके स्थानीय कार्यक्रम को प्राथमिकता देना चाहिए।
रावल, मथुरा को ब्रज की धार्मिक मान्यता में श्री राधा रानी की प्राकट्य-स्थली से जोड़ा जाता है। यहां राधा जन्मोत्सव, छठी पूजन, मंगल गीत, बधाई गायन और अन्य धार्मिक परंपराओं का विशेष महत्व है।
2026 में रावल स्थित राधारानी मंदिर में 19 सितंबर को राधा रानी का प्राकट्य उत्सव यानी राधाष्टमी मनाई जा चुकी है। इससे एक दिन पहले, 18 सितंबर की शाम 7 बजे छठी पूजन का कार्यक्रम रखा गया था। मंदिर की स्थानीय परंपरा के अनुसार राधाष्टमी से पहले छठी पूजन करने की परंपरा निभाई जाती है। इस अवसर पर पूजा-अर्चना, भजन, मंगल गीत और प्रसाद वितरण जैसे धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
रावल की यह परंपरा अन्य स्थानों से अलग हो सकती है। इसलिए यहां होने वाले छठी पूजन को राधाष्टमी के बाद मनाई जाने वाली सामान्य छठी परंपरा के समान नहीं समझना चाहिए। रावल में मंदिर की अपनी प्राचीन स्थानीय परंपरा और आयोजन क्रम का पालन किया जाता है।
बरसाना, वृंदावन, मथुरा और ब्रज के अन्य धार्मिक क्षेत्रों में भी श्री राधा-कृष्ण भक्ति से जुड़े जन्मोत्सव और छठी के आयोजन देखने को मिलते हैं, लेकिन उनकी तारीख, पूजा-विधि और आयोजन का क्रम स्थानीय मंदिर परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए किसी विशेष मंदिर के कार्यक्रम के लिए उसकी आधिकारिक या स्थानीय समय-सारणी को प्राथमिकता देना उचित है।
राधा रानी की छठी का उत्सव अलग-अलग स्थानों और मंदिरों में स्थानीय परंपरा के अनुसार मनाया जा सकता है। विशेषकर ब्रज क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में पूजा-विधि, आयोजन क्रम और समय में अंतर संभव है। इसलिए यदि आप बरसाना, वृंदावन, मथुरा, रावल या किसी अन्य मंदिर में दर्शन या छठी उत्सव में शामिल होने जा रहे हैं, तो संबंधित मंदिर की आधिकारिक समय-सारणी को प्राथमिकता देना उचित रहेगा। स्थानीय परंपरा के कारण तारीख या आयोजन समय में अंतर होना सामान्य है और इसे मंदिर-विशेष की धार्मिक परंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए।
प्रश्न 1: 2026 में राधा जी की छठी कब है?
उत्तर: 2026 में राधा रानी की छठी 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
प्रश्न 2: राधा जी की छठी किस दिन है?
उत्तर: 25 सितंबर 2026 को शुक्रवार है। इसी दिन राधा रानी की छठी का उत्सव मनाया जाएगा।
प्रश्न 3: 2026 में राधा अष्टमी कब है?
उत्तर: राधा अष्टमी 2026 19 सितंबर, शनिवार को है। इसके बाद राधा रानी की छठी का उत्सव मनाया जाता है।
प्रश्न 4: राधा रानी की छठी 25 सितंबर को क्यों है?
उत्तर: 2026 में राधा अष्टमी 19 सितंबर को है और कई स्थानीय परंपराओं में उसके बाद राधा रानी का छठी उत्सव मनाया जाता है। इसी आधार पर 25 सितंबर 2026 को छठी की तारीख रखी गई है।
प्रश्न 5: राधा अष्टमी और राधा रानी की छठी में क्या अंतर है?
उत्तर: राधा अष्टमी श्री राधा रानी के प्राकट्य से जुड़ा मुख्य पर्व है, जबकि राधा रानी की छठी उनके जन्मोत्सव से जुड़ी अलग धार्मिक और स्थानीय परंपरा है।
2026 में राधा जी की छठी 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को मानी जा रही है। राधा अष्टमी 19 सितंबर 2026 को है और उसके बाद राधा रानी के जन्मोत्सव से जुड़ा छठी उत्सव मनाया जाता है।
यदि आपके संबंधित धार्मिक कार्यक्रम में मुख्य छठ पूजन शाम 7 बजे निर्धारित है, तो इसी समय पूजा करें।
राधा रानी की छठी के अवसर पर श्री राधा-कृष्ण की पूजा, भजन-कीर्तन, मंगल गीत, आरती, सात्विक भोग और प्रसाद वितरण किया जा सकता है।
रावल, बरसाना, मथुरा और वृंदावन जैसे ब्रज के धार्मिक क्षेत्रों की स्थानीय मंदिर परंपराओं में आयोजन की विधि या क्रम कुछ अलग हो सकता है। इसलिए किसी विशेष मंदिर के दर्शन या पूजा के लिए उसकी आधिकारिक जानकारी को प्राथमिकता दें।